Anant Chaturdashi Story Vrat Katha Mahtava In Hindi

Anant Chaturdashi Story Vrat Katha Mahtava In Hindi: यह हिन्दू धर्मं का एक महत्वपूर्ण व्रत हैं. जिन्हें भादो माह की शुक्ल चतुर्दशी के दिन किया जाता हैं. अनन्त चतुर्दशी को भगवान् अनन्त जी की पूजा अर्चना की जाती हैं. एवमं सभी कष्टों को हरण करने वाला अनन्तसूत्र बांधते हैं. हमारे धार्मिक ग्रंथों में अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा (Anant Chaturdashi Story) के अनुसार जब पांडव खेल में हारकर चौदह वर्ष के वनवास में कष्ट भोग रहे थे तब श्रीकृष्ण जी ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने को कहा था. इस तरह सभी पांडवों ने Anant Chaturdashi का व्रत कर Vrat Katha को विधि विधान के अनुसार वाचन किया तो उनके समस्त पापों का हरण हो गया.

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Mahtava & anant chaturdashi 2018 Story In Hindi:- वर्ष 2018 में अनन्त चतुर्दशी का व्रत 23 सितम्बर को हैं. इस दिन व्रत रखने वाले भक्त सवेरे स्नान कर व्रत रखने का संकल्प करे. इस दिन की पूजा का प्रावधान किसी जल स्रोत नदी तालाब आदि हैं.

इस तरह का स्थान अनुपलब्ध होने पर किसी स्थान पर नाग शैय्या पर विराजमान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित कर ॐ अनन्तायनम: मंत्र एवं षोडशोपचार-विधि से विष्णु जी का पूजन करना चाहिए.

Anant Chaturdashi Story

अनन्त चतुर्दशी की कहानी कौण्डिन्य मुनि और उनकी पत्नी से जुड़ी हुई हैं. मुनि की पत्नी शीला के बाजू में बंधे अनन्त सूत्र पर जब मुनि की नजर पड़ी तो उसे अहंकारवंश लगा कि यह किसी तन्त्र मन्त्र विद्या का धागा मुझे वंश में करने के लिए बांधा गया हैं. शीला द्वारा हजार बार कहने पर भी कौण्डिन्य मुनि नही माने और वह धागा उन्होंने तोड़कर जला दिया.

अनन्तसूत्र का अपमान करने का फल उन्हें उसी दिन से मिलना आरम्भ हो गया. कौण्डिन्य मुनि जल्द ही भिखारी बन गये. उनका सम्पूर्ण एश्वर्य एवं धन सम्पति नष्ट हो गई. अब उन्हें अपने अपराध का पश्चाताप होने लगा. इसके लिए वह वन में गये और हर किसी से अनन्त भाग्वान् का पता पूछने लगे.

जब किसी ने उनकों नही बताया तो तंग आकर ऋषि आत्महत्या करने की सोच ली. तभी उनकी मुलाक़ात एक वृद्ध ब्राह्मण से हो जाती हैं. वे उन्हें चतुर्भुजअनन्त भगवान् की गुफा में ले जाते हैं. भगवान ऋषि को उनके द्वारा किए गये अपराध की याद दिलाते है तथा उपाय स्वरूप चौदह साल तक अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने को कहते हैं.

लगातार चौदह वर्ष तक यह व्रत कर अनुष्ठान करने से आपका खोया हुआ सम्पूर्ण धन एवं एश्वर्य आपकों पुनः प्राप्त हो जाएगा. कौण्डिन्यमुनि ने चौदह वर्ष तक अनन्त-व्रत का नियमपूर्वक पालन किया और उन्हें सुख सम्पति की पुनः प्राप्ति हो गई.

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