तेजा दशमीं का मेला लोकदेवता तेजाजी महाराज का जीवन परिचय और तेजादशमी की शुभकामनाएं

तेजा दशमीं वीर तेजाजी मेला जीवन कहानी तेजा दशमीं क्यों मनाते है तेजा दशमीं का मेला लोकदेवता तेजाजी महाराज का जीवन परिचय और तेजादशमी की शुभकामनाएं- Veer Teja Ji Mela 2018 In Rajasthan: तेजा दशमी 19 सितम्बर को हैं. यह हिन्दू कलैंडर के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल दशमी तिथि को मनाई जाती हैं. भक्त तेजा के मुख्य मंदिर खरनाल को एक दिन पूर्व ही गोगानवमी की तिथि से ही पहुचना शुरू हो जाते हैं. भजन संध्या के अगले दिन तेजा दशमी होती हैं. इस दिन कई स्थानों पर लोकदेवता तेजाजी के सम्मान में मेलों का आयोजन होता हैं, जिनमें परबतसर का पशु मेला मुख्य हैं. गौरक्षा एवं सांप से रक्षा के लिए पूजे जाने वाले कुंवर तेजाजी की मृत्यु सर्पदंश के कारण भादों सुदी दशमी तिथि को ही हुई थी. इस कारण हम इसे तेजादशमी के रूप में मनाते हैं. पिछले वर्ष यह अगस्त माह में मनाई गई थी.

तेजा दशमीं का मेला

लोक देवता तेजाजी का जन्म नागौर जिले में खड़नाल गांव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ला, चौदस संवत 1130 यथा 29 जनवरी 1074 को जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता गांव के मुखिया थे। वे बचपन से ही वीर, साहसी एवं अवतारी पुरुष थे। बचपन में ही उनके साहसिक कारनामों से लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे। बड़े होने पर राजकुमार तेजा की शादी सुंदर गौरी से हुई।

तेजाजी महाराज का जीवन परिचय

Teja Ji Story In Hindi on Teja Dasmi : खरनाल गणपति बोहीत राव के पुत्र ताहणदेव की छठी सँतान के रूप मे कुँवर तेजपाल का जन्म वि.स.1130,माघ सूक्ला 14,(29-1-1074)के दिन हुआ था , माता का नाम रामकवरी था. तेजल का विवाह उनके ताऊ ताहन जी द्वारा पनेर गाँव में कर दिया था. उस समय उनकी उम्रः बेहद कम थी.

तेजाजी व्यवासय के रूप में खेती व गायों को चराने का काम करते थे. उन्होंने अपने किसान भाइयों को नयें तरीके से खेती करने के कई तरीके भी दिए थे. वे स्वयं सावन की बरसात के बाद खेत बोने जाते थे. जिन पर कई राजस्थानी लोक गीत भी बने हैं.

तेजाजी को जब उनकी भाभी ने पेमल के पीहर बैठे होने का ताना दिया वों उनके कलेजे को पार कर गया. खेत से सीधा घर आकर अपनी माँ से अपने विवाह की बात पूछने लगे. भाभी के ताने से क्रोधित तेजल उसी समय पनेर गाँव जाने का निश्चय करते हैं.

उसी रात पनेर की लाछा गुजरी की गायें चोरी हो जाती है वो तेजाजी को गाये छुडाने की विनती करती हैं. गौभक्त तेजाजी चोरों का पीछा करते हैं. राह में वे एक जलते नाग को अग्नि से बाहर निकाल देते है तब वो अपनी जान के बदले तेजपाल की जान लेने की बात करता हैं.

तेजाजी महाराज अपना संकल्प बताते हुए कहते है हे नागराज अब आप मुझे जाने दे, में गुजरी की गायों को छुडाकर आपका वचन निभाने के लिए वापिस आउगा. वो चोरो से गायों को छुडाकर नाग के पास हाजिर होते है नाग वचनों के पक्के कुंवर तेजा से बेहद प्रसन्न होता हैं. सारा शरीर लहू लुहान होने के बाद भी तेजाजी सर्प को अपनी जुबान पर डंसने को कहते हैं. इस तरह उनकी वहीँ मृत्यु हो जाती हैं.

सत्यवादी तेजाजी को सर्प ने वचन दिया हे तेजा आज के बाद जो भी तुम्हारा नाम लेगा उसे कोई मेरी जाति का साप नही काटेगा. यदि कोई सर्पदंश व्यक्ति आपके नाम की तांती बांधेगा तो उनका जहर उतर जाएगा.

तेजादशमी की शुभकामनाएं

होले होले ही सही
मगर ये पैगाम आ रहे हैं
अपने भक्तों से मिलने तेजाजी आ रहे है
वीर तेजाजी की जय


खुशी लहर तेजा भक्त
तेजाजी की लहर भक्तौ ऊपर मैर


आप सभी को किसानों के आराध्य देव सत्यवादी वीर #तेजाजी की जयंती पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ……….! !
#जय_वीर_तेजाजी……..


जाट मिलेगे कर्मा जैसी नारी मे
जाट मिलेगे #तेजाजी कि बलिदानी मे
जाट मिलेगे सूरजमल कि कहानी मे
जाट मिलेगे @hanumanbeniwal की रैली मे

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