Speech On Diwali For School In Hindi | दिवाली पर भाषण स्कूल के बच्चों के लिए

हेल्लों फ्रेड्स, आज के इस भाषण में हम आपके साथ (Speech On Diwali For School In Hindi )यानि दिवाली पर भाषण स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए दिवाली पर निबंध साझा कर रहे हैं. दिवाली पर भाषण की छोटी व बड़ी कक्षा के विद्यार्थी आसानी से याद कर किसी कार्यक्रम पर भी सुना सकते हैं.

इस तरह के निबंध एवं भाषण के द्वारा स्टूडेंट्स दिवाली के बारे में अच्छी तरह से समझ सकते हैं. वो इस पर्व की जानकारी, मनाने का कारण, इतिहास, कथा आदि को अच्छी तरह से समझ सके.

उन स्टूडेंट्स के लिए जो कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 में पढ़ते हैं उनके लिए 5 लाइन,10 लाइन,100 शब्द,150 शब्द,200 शब्द, 250 शब्द, 300 शब्द, 400 शब्द, 500 शब्दों में दिवाली पर भाषण (Speech On Diwali For School In Hindi) यहाँ नीचे दे रहे हैं.

इस साल दीपावली का यह पर्व 7 नवम्बर के दिन भारत भर में मनाया जाना हैं, बिना समय गवाएं हम अपने दीपावली स्पीच की तरफ बढ़ते हैं.

Short Essay Speech On Diwali For School In Hindi 2018 | दिवाली पर भाषण स्कूल के लिएSpeech On Diwali For School In Hindi | दिवाली पर भाषण स्कूल के बच्चों के लिए

दीपावली पर भाषण ( Happy Diwali speech in Hindi 2018 ): हिन्दू धर्म में यूँ तो रोजाना ही कोई न कोई पर्व उत्सव होता हैं. इन पर्वों एवं त्योहारों में होली दशहरा दीपावली मुख्य हैं. हमारे जीवन में प्रकाश फैलाने वाला दिवाली पर्व कार्तिक माह की अमावस्या की रात की मनाया जाता हैं.

इसे ज्योतिपर्व या प्रकाश उत्सव भी कहा जाता हैं. इस दिन अमावस्या की अँधेरी रात दीपकों और मोमबत्तियों के प्रकाश से जगमगा उठती हैं. वर्षा ऋतु की समाप्ति के साथ साथ खेत में खड़ी धान की फसल भी तैयार हो जाती हैं.

दिवाली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या को आता हैं. इस पर्व की विशेषता यह है कि जिस सप्ताह में यह त्योहार आता हैं उसमें पांच त्योहार होते हैं. इसी वजह से सप्ताह भर लोगों में उत्साह और उल्लास बना रहता हैं.

दीपावली से पहले धनतेरस का पर्व आता हैं मान्यता है कि इस दिन कोई न कोई बर्तन अवश्य ही खरीदना चाहिए. इस दिन नया बर्तन खरीदना शुभ माना जाता हैं. इसके बाद आती हैं छोटी दिवाली, फिर आती है दिवाली. इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा तथा अंत में आता हैं भाईदूज का त्योहार.

अन्य पर्वों की तरह दिवाली के साथ भी कई धार्मिक मान्यताएं एवं ऐतिहासिक घटनाएं जुडी हुई हैं. समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक लक्ष्मी भी इसी दिन प्रकट हुई थी. इसके आलावा जैन मत के अनुसार तीर्थकर महावीर स्वामी का महानिर्वाण भी इसी दिन हुआ था.

भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष श्रीराम लंका नरेश रावण पर विजय प्राप्त कर सीता लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे. उनके अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने भगवान राम के स्वागत के लिए घरों को सजाया और रात में दीपमालिका की.

ऐतिहासिक दृष्टि से दिवाली के दिन से जुडी महत्वपूर्ण घटनाओं में सिक्खों के छठे गुरु हरगोविंदसिंह मुगल शासक औरंगजेब की काराग्रह से इसी दिन को मुक्त हुए थे.

राजा विक्रमादित्य इसी दिन सिंहासन पर बैठे थे, सर्वोदयी नेता आचार्य विनोबा भावे दिवाली के दिन ही स्वर्ग सिधारे थे. आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती तथा प्रसिद्ध वेदांत स्वामी रामतीर्थ जैसे महापुरुष ने इसी दिन मोक्ष प्राप्त किया था.

दिवाली का त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता हैं. इस दिन लोगों द्वारा दीपों तथा मोमबत्तियों जलाने से हुए प्रकाश से कार्तिक मॉस की अमावस्या की रात पूर्णिमा की रात में बदल जाती हैं. इस त्योहार के आगमन की प्रतीक्षा हर किसी को होती हैं.

सामान्यजन जहाँ इस पर्व के आने से एक महीने पहले से ही अपने घरों की साफ़ सफाई रंग पुताई में जुट जाते हैं, वही व्यापारी तथा दूकानदार भी अपनी अपनी दुकाने सजाने लगते हैं दिवाली त्योहार से ही व्यापारी लोग अपने बही खाते की शुरुआत किया करते हैं. दीपावली के दिन बाजार में मेले जैसा माहौल होता हैं.

बाजार तोरनद्वारों तथा रंग बिरंगी पताकाओं से सजाये जाते हैं. मिठाई तथा पटाखों की दुकाने खूब सजी होती हैं. इस दिन खील बताशों तथा मिठाइयों की खूब बिक्री होती हैं. बच्चे अपनी इच्छानुसार बम फुलझड़ियाँ तथा अन्य आतिशबाजी खरीदते हैं.

दिवाली के दिन की रात्रि को लक्ष्मी पूजन होता हैं. माना जाता है की इस दिन की रात को लक्ष्मी का आगमन होता हैं. लोग अपने इष्ट मित्रों के यहाँ मिठाई का आदान प्रदान करके दिवाली की शुभकामनाएं देते हैं.

वैज्ञानिक दर्ष्टि से भी दिवाली त्योहार का अपना अलग महत्व हैं. इस दिन छोड़ी जाने वाली आतिशबाजी व घरों की जाने वाली साफ़ सफाई से वातावरण में कीटाणु समाप्त हो जाते हैं. मकान और दुकानों की साफ सफाई करने से जहाँ सारा वातावरण शुद्ध हो जाता हैं, वही वह स्वास्थ्यवर्धक भी हो जाता हैं.

कुछ लोग दिवाली के दिन जुआ खेलते हैं और शराब पीते हैं. जो कि इस मंगलकामना के पर्व पर एक तरह से कलंक हैं. इसके अलावा आतिशबाजी छोड़ने के दौरान हुए हादसों के कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं. इन बुराइयों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता हैं.

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