कबीर दास के दोहे सम्पूर्ण दोहे संग्रह | Sant Kabir Das Ke Dohe in Hindi

कबीर दास के दोहे सम्पूर्ण दोहे संग्रह | Sant Kabir Das Ke Dohe in Hindi: कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 की पाठ्यपुस्तकों में कबीर दास के सम्पूर्ण दोहे यहाँ स्टूडेंट्स के लिए संकलित किए गये हैं. आप कबीर जयंती पर ये कबीर के दोहे | Kabir Dohe | Hindi Dohe पढ़ सकते हैं. परीक्षा के दृष्टिकोण से आप इस दोहे संग्रह को याद भी कर सकते हैं. बहुत कम स्थानों पर आपकों इस तरह के कबीर दोहे का विशुद्ध संकलन देखने को मिलेगा. हम कबीर के दोहे अर्थसहित के पिछले लेख में आपकों महत्वपूर्ण हिंदी दोहों को अर्थ के साथ यहाँ पर प्रस्तुत किया था, आशा करते है Sant Kabir Hindi Dohe का यह आर्टिकल भी आपकों पसंद आयेगा.

कबीर दास के दोहे सम्पूर्ण दोहे संग्रह | Sant Kabir Das Ke Dohe in Hindiकबीर दास के दोहे सम्पूर्ण दोहे संग्रह | Sant Kabir Das Ke Dohe in Hindi

कबीर दास का संक्षिप्त जीवन परिचय (Kabir Das Ke Dohe Hindi Me):- 

वे पुरुष जिनकी कथनी एवं कथनी में कोई फर्क नही था. उनकें दोहों में गागर में सागर भर देने जैसी विलक्षण क्षमता केवल कबीर जी के जीवन में ही देखि जा सकती हैं. मानवीय प्रेम हो उया ईश्वर प्रेम, गुरु के महत्व की बात हो या असल धर्म की बात, मित्र या दुश्मन की पहचान हो या जीवन के कटु सत्य पर आधारित कबीर के दोहे आज जन जन के प्रेरणा के स्रोत बने हुए है. माना जाता है वे एक जुलाहा जाति में १३९८ को लहरतारा में पैदा हुए थे. बाद में एक मुस्लिम घर में उनकी परवरिश हुई. इस तरह उन्होंने दोनों धर्मों को बड़ी करीबी से देखा. वे निर्गुणवादी कवि थे निराकार ईश्वर की भक्ति एवं समाज में अन्धविश्वास को समाप्त करने के लिए उन्होंने धर्म के बाहरी आडम्बरों का खुलकर विरोध किया. उनके दोहों में कबीर की ललकार स्पष्ट सुनाई पड़ती हैं. 1448 में मगहर में उन्होंने देह त्यागी थी. दुनियां को सच्चाई की राह दिखाने वाले कबीर जी द्वारा रचित इन दोहों को पढ़कर अपने जीवन में अमल में लाते हुए उनके कदमो पर चला जा सकता हैं.

कबीर दास के दोहे हिंदी में

दोहा 1#

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ


दोहा 2#

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।


दोहा 3#

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर,
पंथी को छाया नहीं फल लगे अति दूर।


दोहा 4#
‘हरिमोर पिउ, मैं राम की बहुरिया’
तो कभी कहते हैं, ‘हरि जननी मैं बालक तोरा’।


दोहा 5#
‘बन ते भागा बिहरे पड़ा, करहा अपनी बान।
करहा बेदन कासों कहे, को करहा को जान।।’


दोहा 6#
पाहन पूजे हरि मिलैं, तो मैं पूजौं पहार।
वा ते तो चाकी भली, पीसी खाय संसार।।


दोहा 7#

“संतौ, धोखा कासूं कहिये। गुनमैं निरगुन,
निरगुनमैं गुन, बाट छांड़ि क्यूं बहिसे!”


दोहा 8#

जल में कुम्‍भ, कुम्‍भ में जल है, बाहर भीतर पानी
फूटा कुम्‍भ जल जलहीं समाना, यह तथ कथौ गियानी।”


दोहा 9#

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।


दोहा 10#

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

कबीर के दोहे | Kabir Dohe | Hindi Dohe


दोहा 11#

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।


दोहा 12#

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।


दोहा 13#

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।


दोहा 14#

हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी, केस जलै ज्यूं घास.
सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास.


दोहा 15#

संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत
चन्दन भुवंगा बैठिया, तऊ सीतलता न तजंत।


दोहा 16#

चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह।
जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शहनशाह॥


दोहा 17#

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर


दोहा 18#

बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर


दोहा 19#

दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥


दोहा 20#

साधू गाँठ न बाँधई उदर समाता लेय।
आगे पाछे हरी खड़े जब माँगे तब देय॥


दोहा 21#

देह खेह होय जायगी, कौन कहेगा देह।
निश्चय कर उपकार ही, जीवन का फन येह।”


दोहा 22#

“इष्ट मिले अरु मन मिले, मिले सकल रस रीति।
कहैं कबीर तहँ जाइये, यह सन्तन की प्रीति।”


दोहा 23#

“बहते को मत बहन दो, कर गहि एचहु ठौर।
कह्यो सुन्यो मानै नहीं, शब्द कहो दुइ और।”


दोहा 24#

माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय॥


दोहा 25#

जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल।
तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल॥

कबीर दास के दोहे सम्पूर्ण दोहे संग्रह


दोहा 26#

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।


दोहा 27#

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।


दोहा 28#

चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये |
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए


दोहा 29#

ते दिन गए अकारथ ही, संगत भई न संग |
प्रेम बिना पशु जीवन, भक्ति बिना भगवंत


दोहा 30#

जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही |
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही


दोहा 31#

शीलवंत सबसे बड़ा सब रतनन की खान |
तीन लोक की सम्पदा, रही शील में आन


दोहा 32#

कुटिल वचन सबसे बुरा, जा से होत न चार |
साधू वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार


दोहा 33#

कुटिल वचन सबसे बुरा, जा से होत न चार |
साधू वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार


दोहा 34#

कुटिल वचन सबसे बुरा, जा से होत न चार |
साधू वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार


दोहा 35#

कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोये,
ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये


दोहा 36#

लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ।
पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट ॥


दोहा 37#

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।
राजा परजा जेहि रूचै, सीस देइ ले जाय।।


दोहा 38#

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।
राजा परजा जेहि रूचै, सीस देइ ले जाय।।


दोहा 39#

मक्खी गुड में गडी रहे, पंख रहे लिपटाये,
हाथ मले और सिर ढूंढे, लालच बुरी बलाये।


दोहा 40#

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।


दोहा 41#

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।


दोहा 42#

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर.

मित्रों आशा करता हूँ कबीर दास के दोहे सम्पूर्ण दोहे संग्रह का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. कबीर दास जी के दिए गये दोहे आपकों अच्छे लगे हो तो प्लीज इस लेख को अपने फ्रेड्स के साथ जरुर शेयर करे.

Sant Kabir Das Ke Dohe in Hindi के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो नीचे दी गई सम्बन्धित लेख की लिंक पर जाकर आप कबीर जी का जीवन परिचय जीवनी अन्य दोहे अर्थ के साथ व उनकी रचनाओं के बारे में पढ़ सकते हैं.

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