सद्भावना दिवस पर भाषण | Sadbhavana Diwas Speech In Hindi

Sadbhavana Diwas Speech In Hindi: राष्ट्रीय एकता और प्रगति के लिए आवश्यक तत्व सद्भावना आपसी सोहार्द आज की महती आवश्यकता हैं. Sadbhavana Diwas Speech पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जन्मदिन जिसे सद्भावना दिवस या समरसता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. मानवीय मूल्यों पर आधारित इस सोच से देश की घरेलू सुरक्षा व्यवस्था को मदद मिल सकेगी. 20 अगस्त 2018, सोमवार को सद्भावना दिवस 2018 मनाया जा रहा हैं. Speech On Sadbhavana Diwas में सद्भाव का अर्थ, कार्यक्रम, पूर्व प्रधानमंत्री के सद्भावना प्रयासों के बारे में जानकारी दी गयी हैं.

सद्भावना दिवस पर भाषण | Sadbhavana Diwas Speech In Hindi

सद्भावना दिवस पर भाषण | Sadbhavana Diwas Speech In Hindi

सद्भावना दिवस पर भाषण– इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद एक युग का अंत एवं युवा युग की नीव राजीव गांधी ने रखी थी. भारत में सूचना क्रांति लाने वाले गांधी ने भारत में आपसी प्रेम एवं सद्भावना की भावना के साथ भारत को एक विकसित राष्ट्र बनते देखना चाहते थे. सद्भावना का अर्थ होता है सभी के प्रति समान भावना. यानी देश के नागरिक हो या राजनेता अथवा उद्यमी सभी को अपने विचार इस प्रकार रखने चाहिए, जिसमे किसी व्यक्ति के साथ उनकी जाति धर्म सम्प्रदाय आदि के अनुसार न देखकर समान भाव से एक भारतीय समझा जाना चाहिए.

इसी सोच को आगे बढाने वाले श्री राजीव जी के जन्मदिन को आज हम सद्भावना दिवस के रूप में मना रहे हैं. भारत का दुर्भाग्य ही था कि इस तरह का मानवीय द्रष्टिकोण रखने वाले युवा प्रधानमंत्री का बम धमाके में देहांत हो गया था. उन्होंने अपनी सरकारी नीतियों के द्वारा भी समाज की दूरियों तथा आपसी भेदभाव को मिटाने का प्रयास अपने जीवन के अंतिम दिन तक अनवरत जारी रखा था.

लाल बहादुर शास्त्री से राजीव गांधी तक सभी प्रधानमंत्री लोगों के आपसी मनमुटाव के कारण मारे गये थे. आज की युवा पीढ़ी को भारत के अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए मानव मानव में भेद को त्यागकर सामुदायिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, शांति, प्यार और लगाव जैसे उच्च मूल्यों को अपने जीवन में स्थापित करना चाहिए.

आज जहाँ भी देखों हर मुद्दे पर राजनीति करने का प्रयास किया जाता हैं. हर एक घटना को धर्म से जोड़कर देखा जाने लगा हैं. देश के सबसे बड़े दुश्मन पाकिस्तान और उसके आतंकवाद को लोग सरेआम समर्थन देते हैं. इस तरह कैसे राजीव गांधी का सपना पूरा हो सकेगा, वो महामानव भी गलती कर बैठे थे जिन्होंने अपनी सुरक्षा को हटा लिया था जिसका खामियाजा उनकी मृत्यु के रूप में चुकाना पड़ा था.

20 अगस्त के दिन अक्षय ऊर्जा दिवस भी हैं वर्तमान काल में हमारी राज्य एवं केंद्र की सरकारे इस विषय पर अपना ख़ासा ध्यान दे रही हैं. चलिए मैं लौटकर मुद्दे पर आता हूँ, राजीव गांधी व्यक्ति के लिहाज से 9 वें प्रधानमंत्री थे. जो कि नेहरु जी के पौत्र एवं इंदिरा के पुत्र थे. इनके पिता का नाम फिरोज गांधी था. आज ही के दिन 20 अगस्त 1944 को इनका जन्म बम्बई में हुआ था. इन्होने सोनिया गांधी से शादी की तथा इंदिरा गांधी के देहावसान के बाद राजीव गांधी भारी बहुमत के साथ भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने.

आज के युग की बात वे हमेशा किया करते थे. राजीव गांधी कहते थे. भले ही ये देश पुराना हो मगर यह राष्ट्र अभी जवान हैं. एक नौजवान की तरह इसके बाजुओं में पूरा दमखम हैं हर कोई सपना देखता है मैंने भी एक ऐसे भारत का सपना देखा है जो सभी अर्थों में शक्तिशाली हो, सम्पन्न हो, आत्मनिर्भर हो तथा इस देश की जनता मानवीय मूल्यों की पुजारी हो.

ऐसे राष्ट्रनायक को आज हम मानवता की राह पर चलने की प्रतिज्ञा कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं. हमे प्रार्थना करनी चाहिए, ईश्वर हमें सद्बुद्धि प्रदान करे हम ऐसे महापुरुष की राह चल सके, उनके विचारों को जन जन तक पहुचा सके तथा उनके सपनों का भारत उन्हें श्रद्धांजलि के रूप में भेट अर्पित कर सके. इन्ही शब्दों के साथ में अपने Sadbhavana Diwas Speech को यही समाप्त करना चाहुगा, जय हिन्द ! जय भारत !

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