Mera Priya Tyohar Diwali In Hindi मेरा प्रिय त्योहार दिवाली हिंदी निबंध स्टूडेंट्स के लिए

Mera Priya Tyohar Diwali In Hindi मेरा प्रिय त्योहार दिवाली हिंदी निबंध स्टूडेंट्स के लिए: हमारा देश त्योहारो का देश कहलाता है यहाँ हर माह कोई न कोई उत्सव जरुर होता हैं. धार्मिक सद्भाव की इस पावन्धरा पर हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सभी मिलकर एक दुसरे के त्योहारों को बड़ी धूम धाम के साथ मनाते हैं. दिवाली अर्थात दीपावली मेरा प्रिय त्योहार है जो कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती हैं, इसे दीपो का त्योहार व् प्रकाशोतस्व भी कहा जाता हैं. 2018 में 7 नवम्बर को दीपावली हैं. आज के इस छोटे से निबंध में मैं अपने प्रिय त्योहार दिवाली पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी आपके साथ शेयर कर रहा हूँ.

Mera Priya Tyohar Diwali

दिवाली की शुरुआत धनतेरस के साथ होती है, जो कार्तिक त्रयोदशी के दिन होता है पांच दिनों के इस शुभ त्योहार के आगमन दिवस धनतेरस को भगवान् धन्वन्तरी की पूजा की जाती है, इसके पीछे मान्यता यह है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन उनका जन्म पृथ्वी पर हुआ था. इस दिन बर्तन एवं आभूषन की खरीददारी भी जाती हैं. दिवाली के त्योहार में धनतेरस का बड़ा महत्व हैं.

मेरे प्रिय त्योहार दिवाली का दूसरा दिन रूप चौदस अर्थात रूप चतुर्दशी का होता है. इससे जुड़े कथा के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन होता है. रूप चौदस के दिन सवेरे जल्दी उठकर स्नान करने से पापों का नाश एवं सौदर्य की प्राप्ति होती हैं.

इस पर्व का तीसरा दिन दिवाली अर्थात लक्ष्मी पूजन का दिन होता है इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती हैं. घर में दीपक जलाकर रौशनी से नहलाया जाता हैं. यह माँ लक्ष्मी का जन्म दिन है इन्हें धन एवं एश्वर्य की देवी माना जाता है इसलिए इस दिन उनकी पूजा की जाती हैं.

मेरे प्रिय पर्व दिवाली का चौथा दिन अन्नकूट या गौवर्धन पूजा के रूप में जाना जाता हैं. इस दिन गौवंश की पूजा की जाती हैं. भगवान् कृष्ण को समर्पित इस दिन मन्दिरों में कृष्ण के भजनों एवं गीतों का दौर चलता रहता हैं. गौवर्धन पूजा के पीछे की कहानी के अनुसार कृष्ण ने इंद्र देव का अहंकार समाप्त करने के लिए गौवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर सात दिनों तक तेज बारिश के बावजूद अपने गाँव में एक बूंद बारिश नही होने दी.

दिवाली का आखिरी दिन भैया दूज कहलाता है यह रक्षाबंधन की तरह की भाई बहिन के प्यार का पर्व हैं. भाई बहिन के प्यार एवं भाई की लम्बी आयु की कामना के लिए बहिन व्रत रखती है तथा अपने भाई के यहाँ आकर व्रत को तोडती हैं. भाई अपनी बहिन को उपहार देता हैं. इस दिन दिवाली का यह त्यौहार पांच दिनों तक बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं.

मेरे प्रिय त्यौहार दिवाली होने की मुख्य वजह यह हैं, कि मैं मर्यादा पुरुषोतम भगवान् श्रीराम का भक्त हूँ. इस त्योहार को मनाने का कारण राम ही थे. दिवाली की कथा के अनुसार अयोध्या नरेश श्रीराम को जब 14 वर्ष का वनवास मिला था. जब वे अपनी वनवास की अवधि पूर्ण कर अयोध्या आए तो वह कार्तिक अमावस्या की काली रात का दिन था. अयोध्यावासियों ने अपने प्रिय राम के लौटने की खुशी में घी के दिए जलाए और उनका स्वागत किया तब से यह पर्व मनाया जा रहा हैं.

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