History Of Diwali In Hindi | दिवाली का इतिहास | Diwali History

History Of Diwali In Hindi | दिवाली का इतिहास | Diwali History: क्या है दीपावली का इतिहास, दिवाली की कहानी पौराणिक कथाएँ, मनाने का महत्व, कब और क्यों मनाते है दीपों का त्योहार दीपावली इनकी चर्चा हम दिवाली इतिहास- Diwali History में यहाँ करने वाले हैं. 7 नवम्बर 2018 को माँ लक्ष्मी को समर्पित हिन्दुओं का सर्वश्रेष्ट पर्व दिवाली मनाया जाना हैं. देश भर में इनकों मनाने के पीछे कई धार्मिक कथाओं एवं प्रसंगों के विवरण मिलते हैं. History Of Diwali में हम उन सभी स्टोरी के बारे में आपकों बताने वाले है जिन्हें इस पर्व से जोड़कर देखा जाता हैं. लेख आरम्भ करने से पूर्व सभी पाठकों को दीपावली 2018 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए.

What Is History Of Diwali Festival, Why We Celebrate Deepawali 2018history of diwali in Hindu sikh Bodh And Jain

history of Diwali in Hindu Sikh Bodh And Jain: फेस्टिवल ऑफ़ लाइट्स यानी दीयों या प्रकाश का पर्व कहा जाने वाला दिवाली पर्व अति प्राचीन हिन्दू त्योहार है. जो भारत में मुख्य रूप से मनाया जाता है इसके अतिरिक्त यह कई अन्य एशियाई देशों में भी मनाते है जिनमें नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया मुख्य है यहाँ पर प्रवासी भारतीय इसे मनाते हैं.

दिवाली मनाने का इतिहास

यह एक धार्मिक पर्व है जिसे अन्याय पर न्याय, अंधकार पर प्रकाश, अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक भी माना जाता हैं. हमारे वेदों और उपनिषद में वर्णित उक्ति अंधकार से प्रकाश की ओर के संदेश को उद्घृत करने वाला यह पर्व कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है जो अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार अक्टूबर अथवा नवम्बर माह में पड़ता हैं. धार्मिक सामजिक, आध्यात्मिक एवं आर्थिक महत्व के इस पर्व को वर्षा ऋतू के समापन एवं शीत ऋतू के आगमन की कड़ी के रूप में मनाया जाता हैं.

सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के अनुयायी से भी इसे पूर्ण आस्था एवं निष्ठा के साथ मनाते है सिख धर्म में इसे बंदी गृह मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन सिख धरम के छठे गुरु हरगोविंद सिंह को जहाँगीर की कैद से रिहा किया गया था. जैन धर्म की मान्यता के अनुसार दिवाली के दिन ही उनके तीर्थकर महावीर स्वामी को मोक्ष मिला था इस कारण ये मोक्ष दिवस के रूप में इसे मनाते हैं.

History Of Diwali In Hindu Religions

आमतौर पर जिसे दिवाली की कथा माना जाता है अथवा जिस कहानी से प्रेरित होकर हम इस दीपोत्सव को मनाते है वह भगवान राम से जुड़ी हुई हैं. माना जाता है कि कार्तिक अमावस्या की रात्रि को ही भगवान राम ने चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या की धरती पर कदम रखा था. उनके आगमन से यहाँ की जनता बेहद प्रसन्न हुई तथा दुष्ट रावण का अंत कर अयोध्या लौटे राम के स्वागत में लोगों ने घी के दिए जलायें तथा उनके आगमन को एक पर्व की भांति मनाया. असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक दीपावली की कथा तो भले ही हम राम से जोडकर मनाते है मगर आज तक हम यह नही समझ पाए है कि दशहरा के सिवाय दीवाली के किसी पर्व में भगवान राम की पूजा क्यों नही की जाती हैं.

दिवाली एक तरह से सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वच्छता अभियान हैं. इसके आने से एक माह पूर्व से ही लोग अपने घरों दुकानों मोहल्लों आदि की सफाई में जुट जाते है. महीनों से पड़ी गंदगी को हटाकर वातावरण को रमणीय बना दिया जाता हैं. इस अवसर पर घरों में रंग रोगन कर खूब सजाया जाता है, घर के आगंन में रंगोली की डिजाइन उकेरी जाती हैं. दिवाली की रात सारा संसार रोशनी से जगमगाता हुआ प्रतीत होता हैं. इसे आध्यात्मिक स्वच्छता अभियान इसलिए कहा गया है क्योंकि लोग अपने मन एवं ह्रदय की बुराइयों कुव्रतियों का इस पर्व पर त्याग कर सत्य एवं न्याय की राह पर चलने का संकल्प लेती हैं.

दीपावली 2018 कब है डेट मुहूर्त समय

  • 5 नवम्बर 2018 सोमवार– 2018 में दिवाली का यह पहला दिन है इसे हम धनतेरस के रूप में मनाते हैं. इस दिन सोने चांदी के बर्तनों की खरीद मुख्य रूप से की जाती हैं. महालक्ष्मी की मूर्तियाँ एवं पूजा सामग्री भी इस दिन खरीदकर घर लाइ जाती हैं. कुछ लोग इस दिन झाड़ू भी खरीदते हैं. इस दिन धन के स्वामी कुबेर एवं अयोग्यता के स्वामी भगवान् धन्वन्तरी की पूजा होती हैं. इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता हैं.
  • 6 नवम्बर 2018 मंगलवार– यह पांच दिनों के दिवाली उत्सव का दूसरा एवं महत्वपूर्ण दिन है इन्हें नरक चतुर्दशी, रूप चौदस या छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है यह कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी का दिन होता हैं. इस दिन सवेरे जल्दी उठकर नहाना पुण्यकारी माना गया हैं. नरक चतुर्दशी का पर्व मृत्यु के स्वामी यमराज को समर्पित दिन है. इस रात दक्षिण दिशा में यम का द्वीप जलाने से अकाल मृत्यु का प्रकोप समाप्त हो जाता हैं.
  • 7 नवम्बर 2018 बुधवार– यह दिवाली 2018 का दिन है इसे बड़ी दीपावली, लक्ष्मी पूजन आदि भी कहा जाता हैं. यह इस पर्व का सबसे बड़ा दिन है इस रात्री को माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता हैं. घर को रोशनी से नहलाया जाता हैं. व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए यह नववर्ष का दिन होता है वे अपने नयें हिसाब खाते की शुरुआत इसी दिन से करते हैं.
  • 8 नवम्बर 2018 गुरुवार-यह गौवर्धन पूजा का भगवान कृष्ण को समर्पित दिन हैं. इसे अन्नकूट पर्व के रूप में भी मनाते है. इसकी कथा के अनुसार कृष्ण ने देवराज इंद्र ने दर्भ को समाप्त किया था.
  • 9 नवम्बर 2018 शुक्रवार- भैया दूज या भाई दूज को दिवाली के पांच पर्वों का सबसे आखिरी दिन के रूप में मनाते हैं. यह भाई बहिन के प्यार का त्यौहार है. भाई अपनी बहिन को इस दिन अपने घर आमंत्रित करता है.

दिवाली 2018 का शुभ मुहूर्त ( Diwali Festival 2018 Muhurt )

  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्ता का समय (5.57 से लेकर 7:53 तक)
  • प्रदोष काल 5:30 से लेकर 8:11 तक)
  • वृषभ काल (5.57 से लेकर 7:53 तक)

यदि दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन सही मुहूर्त एवं सही समय पर किया जाए तो ही इसके फल की प्राप्ति हो पाती है. वृश्चिक लग्न दिवाली के दिन सुबह के वक्त होता है इस समय के दौरान बिल्डिग प्रतिष्ठान दूकान आदि में पूजा सम्पन्न करवाई जाती हैं. जीवन में रोग दरिद्रता से पीड़ित लोग दिवाली की पूजा कुम्भ लग्न में करते है यह दोपहर का समय होता हैं. दीपावली पूजा का सही समय वृषभ लग्न को माना गया है यह सूर्यास्त का समय है. इसके अतिरिक्त रात्री के समय की जाने वाली पूजा सिंह लग्न में होती है यह भी शुभ मुहूर्त हैं.

Diwali History

भारत में मनाए जाने वाले अधिकतर पर्वों का सम्बन्ध कृषि एवं ऋतुओं से भी होता हैं. दिवाली का त्यौहार भी ऐसे ही हैं. यह वर्षा ऋतू की समाप्ति एवं शीत ऋतू के आगमन से पूर्व मनाया जाता हैं. किसान अपने खरीफ की फसल की कटाई कर चुके होते है तथा अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए वे उन्हें नयें धान को प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं.

दिवाली के इतिहास की बात की जाए तो इनका विवरण  पद्म पुराण और स्कन्द पुराण में संस्कृत भाषा में लिखा मिलता हैं. जिनमें दीपक को सूर्य का प्रतीक मानकार उनका पूजन किया जाता हैं. जिस तरह सूर्य सम्पूर्ण संसार को ऊर्जा एवं आलोकित करता हैं. पहली सदी से पूर्व रचित उपनिषद में भी दिवाली मनाए जाने के पर्याप्त विवरण मिलते हैं. भारत के इतिहास में 7 वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सव की उपाधि से नवाजा गया था. इसके पीछे की मान्यता यह थी की इसने दीपक जलाकर नवविवाहितों को दिवाली के दिन भेट देने की परम्परा की शुरुआत की थी.

9 वीं शताब्दी में राजशेखर ने काव्यमीमांसा रचना में दीपावली को दीपमालिका नाम से उद्बोधित किया हैं. वे लिखते है कि इस अवसर पर लोग अपने घरों की सफाई किया करते हैं. घर आंगन सडक मोहल्ला आदि रौशनी की सजावट से चमक उठते हैं. भारत के ऐतिहासिक संस्मरण पर विदेशी यात्री अलबरूनी ने भी अपनी किताब में दीवाली के बारे में विवरण में दिया गया हैं. ग्याह्र्वी सदी के भारत में लिखी गई इस किताब में कहा गया कि यह हिन्दुओं का कार्तिक के नयें चाँद के दर्शन पर मनाया जाने वाला उत्सव हैं.

पांच पर्वों का समूह दीपावली

दिवाली एक दिन का पर्व न होकर यह पांच दिनों का एक संयुक्त त्योहार हैं इस दिन कई स्थानों पर मेले भरते हैं. लोग दशहरे के बाद से ही दिवाली की तैयारियों में जुट जाते है अपने लिए नयें वस्त्र सिलवाते हैं. दिवाली पर वर्ष की सबसे अधिक खरीददारी भी होती हैं. धनतेरस का दिन जो इससे दो दिन पहले पड़ता है इस दिन हर कोई कुछ न कुछ अवश्य खरीदता है. खील-बताशे, मिठाइयाँ, खांड़ के खिलौने, लक्ष्मी-गणेश आदि की मूर्तियाँ बाजार के द्रश्य में हर कही नजर आ हीओ जाती हैं. आजकल मिटटी के दीपकों की बजाय विद्युत् से चलने वाली लाइट से दिवाली की सजावट का प्रचलन चल पड़ा हैं. लोग खुशी के साथ मिलकर इस पर्व को मनाते है एक दुसरे को मिठाइयाँ उपहार व बधाई भेजते हैं.

देर रात तक पटाखों की गूंज से सारा आसमा थर्रा उठता हैं. इस दीपवली हमारी तरफ से आपकों दो निवेदन किये जाते हैं प्रथम तो यह कि इस बार हम लक्ष्मी गणेश एवं माँ सरस्वती के पूजन के साथ साथ भगवान् राम की पूजा भी करे, क्योंकि एक तरफ हम कहते है यह राम जी के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता हैं. दूसरी तरफ दिवाली के राम राम के सिवाय हम राम को पूर्ण रूप से नजरअंदाज करते जा रहे हैं. हमारा दूसरा निवेदन यह है कि कम से कम पटाखे छोड़े, माँ लक्ष्मी पटाखों से प्रसन्न नही होती हैं वह हमारी आस्था एवं विश्वास में बसती हैं. अतः हमें अपने पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इस विषय पर जरुर सोचना चाहिए.


आशा करता हूँ मित्रों History Of Diwali In Hindi, Diwali History Hindi, Diwali Ka Itihas का यह लेख पसंद आया होगा. यदि आपकों इस लेख में दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे, यदि आप दिवाली पर्व की अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो हमारे अन्य लेख पढ़े जो नीचे दिए जा रहे हैं.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *