Hariyali Teej Poem In Hindi- हरियाली तीज पर कविता

Hariyali Teej Poem In Hindi- हरियाली तीज पर कविता: १३ अगस्त को हिन्दू स्त्रियों का पर्व हरियाली तीज आ रहा हैं. Poem On Hariyali Teej के इस आर्टिकल में आपकें लिए तीज पर कविता पोएम लेकर आए हैं. सावन की हरियाली के बिच मनाया जाने वाला यह उत्सव अपने गीतों एवं पेड़ की शाखाओं पर झूलते झूलों के लिए जाना जाता हैं. महिलाओं द्वारा इस दिन शिव पार्वती का व्रत भी रखा जाता हैं. Hariyali Teej Poem In Hindi में आप तीज पर्व पर आधारित पांच हिंदी कविता पढेगे, जिन्हें हमने सोशल मिडिया से आपकें लिए प्रस्तुत किया हैं. सभी बहिनों को हमारी ओर हरियाली तीज की मंगलकामना.

Hariyali Teej Poem In Hindi- हरियाली तीज पर कविताHariyali Teej Poem In Hindi- हरियाली तीज पर कविता

Hartalika Or Hariyali Teej Poem In Hindi:-

ये है तीज का त्योहार

सखियों के संग नाचू गाऊ
खुशियां में मनाऊं
ये है खुशियों का त्योहार

हाथों में मेहंदी में रचाऊ
खुशी के गीत गाऊ
ये है तीज का त्योहार

थाल में सजाऊं
खुशी के गीत गाऊ
ये है तीज का त्योहार

सखियों संग नाचूं गाऊ
खुशियां में मनाऊं
ये है हरियाली तीज का त्योहार

शिवजी की आराधना करू
पति की लंबी उम्र की में कामना करू
खुशियां में मनाऊं

Hariyali Teej Poem In Hindi

बड़ी तीज यह हमारी माताओं बहिनों का सबसे बड़ा त्योहार हैं. सोलह श्रृंगार करना, मेहँदी से हाथ सजाना, सहेलियों के साथ झूले झूलने जाना, व्रत रखना, सावन के गीत गाना भाई यही ख़ास बात हैं. हरियाली तीज की. अपने पतिदेव की दीर्घायु की कामना के लिए वे शिव पार्वती जी का व्रत धारण करती है. उनकी उपासना करती है. एक काव्यप्रेमी दिल को हरियाली तीज पर कविता लिखने की ललक जगा जाती हैं. कुछ कलमकारों की रचनाएं आपके लिए यहाँ पेश की गई हैं.

Hariyali Teej Poem Shayari

तीज की कविता…
हरियाली तीज…
हल्की-हल्की फुहार है
ये सावन की बहार है
संग यारो के झूले आओ
आज तीज का त्यौहार है ।

झूम उठते है दिल सभी के
इसके गीतो के तराने से
जुड जाते है टूटे सम्पर्क
बस झूलने के बहाने से ।

इस तीज के पावन मौके पर
मिलकर झूला झूले आओ
एक दूजे के सहयोग से
आसमान को छूले आओ ।
गुजियाँ खाओ, घेवर खाओ
जितने चाहो मेवा खाओ
पर छोटे-बडो के लिये हमेशा
दिल मे रखो सेवा भाव ।

एक जुट होकर आओ सारे
एक ही सुर मे गाओ सारे
यही कहते है संस्कार हमारे
मिल जुलकर तीज मनाओ सारे ।।
BY ASHUTOSH SAINI

हरियाली तीज पर कविता – Poems On Hariyali Teej 2018

आकाश ने भेजा है
धरती को हरितालिका तीज
लेकर आये हैं भाई बादल
हरी साड़ी चूड़िया हरी
फल मिठाइया खूब
किशोरी से युवती हो रही नदिया
उमड़ रही है देखकर बादलों को
मछलियों की चमक रही है आखे
नाच रहे है मोर

गा रहे है दादुर
सीप और घोघो में भी पड़ गयी है जान
बस तिलमिला रही है अकेली ननद धूप
छिपती -फिरती इधर -उधर
कि कब जायेगे मुए बादल
और कायम होगा फिर से उसका राज

खुशी से उछल रही है धरती
रचा रही है मेहदी झूल रही है झूला
गा रही है कजरी जबकि रो रहे है
भोकार पार बादल
देखकर बरस बाद बहन को पूछती है
धरती – गये थे क्या छोटी के पास भी रेगिस्तान?
भाई हैरान कि है एक बहन और

सुदूर रेगिस्तान सोच रहे है
वे -तो इसीलिए जाते हैं बड़े भैया
बहाने से कभी-कभार रेगिस्तान
बता रही है धरती छोटी ने किया था
प्रेम -विवाह बहिष्कृत होकर सबसे
रेत-रेत हो गयी भुगत रहे हैं
खमियाजा आज भी उसके बेटे पेड़

बहन तो आखिर बहन होती है वो भी सहोदरा
रोती है धरती मुह पर डाल कर आँचल
करते हैं बादल वादा उससे
जायेगे जरूर किसी न किसी सावन
छोटी को लेकर तीज हरी साड़ी चूड़िया हरी
फल मिठाइयाँ खूब

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