महात्मा गांधी जयंती एस्से निबंध 2018 | Gandhi jayanti Essay in Hindi

Mahatma Gandhi Jayanti 2 October 2018: भारत की एक महान विभूति जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था. इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में पोरबंदर गुजरात में हुआ था. राष्ट्रपिता के रूप में जाने जाने वाले बापू महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को मनाई जाती हैं. आज के इस गांधी जयंती के निबंध (Gandhi jayanti Essay) के माध्यम से स्टूडेंट्स जो कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 में पढ़ते है और गांधी शास्त्री जयंती 2018 पर निबंध एस्से भाषण आदि का पठन करना चाहते है तो आप सरल भाषा में लिखे गये इस निबंध का प्रयोग कर सकते हैं.

महात्मा गांधी जयंती एस्से इन हिंदी

महात्मा गांधी जयंती एस्से

दलितों पीड़ितों एवं अहिंसा के पुजारी मोहनदास करमचन्द गांधी भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी थे. वे एक मायने में सच्चे इन्सान, मानवता वादी विचारक एवं सच्चे राजनेता थे. उन्होंने न केवल राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए संग्राम लड़ा बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों तथा भेदभाव का भी कड़ा विरोध किया.

2 अक्टूबर के दिन गुजरात के पोरबंदर में जन्मे बापू के जन्म दिन को हम गांधी जयंती के रूप में मनाते हैं. विगत सदी के सबसे महान पुरुष के रूप में याद किये जाने वाले गांधी अपने सिद्धांतों के पक्के इन्सान थे. उनका जीवन आज हर भारतीय के लिए आदर्श हैं.

Gandhi jayanti Essay in Hindi 2018

गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को देशभर में अहिंसा दिवस के रूप में मनाई जाती हैं. चूँकि सत्य एवं अहिंसा गांधीजी के मूल सिद्धांत थे, जिनका जीवन भर उन्होंने पोषण किया था. इस दिन राजघाट दिल्ली में स्थित गांधीजी की समाधि पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर सभी पदाधिकारी व मंत्री बापू को श्रद्धांजली अर्पित करते हैं.

“वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे” ये महात्मा गांधी का प्रिय भजन था. जिनमें उनकी पिछड़े वर्ग के प्रति सच्ची संवेदनशीलता दिखती हैं. हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक गांधी बाबा को इस दिन सम्पूर्ण राष्ट्र नमन करता है और उन्हें श्रद्धांजली अर्पित करता हैं.

2 अक्टूबर गांधी जयंती 2018 के लिए निबंध

देशभर में इस दिन राजकीय अवकाश होने के उपरान्त भी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बापू को श्रद्धांजली अर्पित करने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिनमें विद्यार्थियों को गांधीजी पर कविता भाषण नाटक निबंध शायरी आदि प्रस्तुत करने को कहा जाता हैं.

खादी एवं स्वदेश से प्रेम करने वाले बापू ने अपने आदर्शों की अनुपम मिशाल पेश की है. जिन पर चलकर संसार में शान्ति एवं भाईचारा कायम किया जा सकता हैं. कई तरह के जनहित कार्यक्रम रक्त दान, पौधारोपण, कुटीर उद्योगों के उत्पाद की प्रदर्शनी, स्वच्छता के लिए जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं.

आज गांधी अपने गांधीवाद की विचारधारा के रूप में दर्शन का रूप ले चुके हैं. बीसवी सदी में इस विचारधारा को मानने वाले की संख्या लाखों में थी. सच्चे कर्म एवं ईमानदारी की राह पर चलने वाले बापू ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी. वे सच्चे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे.

भारत की आजादी के लिए बनी राजनितिक पार्टी कांग्रेस के वे अध्यक्ष भी रह चुके थे. कांग्रेस पर उनकी विचारधारा का गहरा प्रभाव था. मगर आजादी के बाद उन्होंने इसी कांग्रेस का त्याग कर दिया तथा किसी राजनीतिक पद एवं प्रतिष्ठा का स्वार्थ उनसे कोसों दूर था. वे चाहते तो प्रधानमंत्री भी बन सकते थे, मगर उन्होंने ऐसा कभी नही किया. यह उनकी सच्ची देशभक्ति एवं निस्वार्थ राष्ट्रसेवा का उदहारण हैं.

उन्होंने कहा था कि अब कांग्रेस को समाप्त कर दिया जाए क्योंकि इन्हें जिस उद्देश्य से बनाया गया था. हम उसे प्राप्त कर चुके है. अब सत्ता के लिए कांग्रेस का दुरूपयोग ना किया जाए. दूसरी तरफ शुरुआत में वे पाकिस्तान निर्माण की मांग के प्रबल विरोधियों में से एक थे. लेकिन बढती हिंसा एवं एक तरफ जिन्ना एवं दूसरी तरफ नेहरु जैसे लोगों की सत्ता लोलुपता के चलते वों भविष्य में होने वाले नरसंहार से देश को बचाने के लिए पाकिस्तान के समर्थन में आ गये.

भले ही कुछ विषयों पर महात्मा गांधी की आलोचना की जाती हो. मगर वे सच्चे देशनायक थे., भारत की स्वतंत्रता, समाज सुधार एवं समर्द्ध भारत का सपना देखने वाले गांधीजी की 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ऐसे महान पुरुष को गांधी जयंती पर हम नमन करते हैं.

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