Durga Puja Essay In Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 – Essay on Durga Puja in Hindi

Durga Puja Essay In Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 – Essay on Durga Puja in Hindi: समस्त पाठकों को Durga Puja 2018 की बधाई. 15 अक्तूबर से दुर्गा पूजा उत्सव मनाया जा रहा हैं. स्टूडेंट्स के लिए हिंदी में दुर्गा पूजा पर छोटा निबंध भाषण यहाँ दिया गया हैं. Essay on Durga Puja/ Durga Puja Essay में इसे मनाने का कारण तिथि इतिहास व जुड़े प्रसगों तथा धार्मिक महत्व के बारें में आपकों जानकारी दे रहे हैं. short essay on durga puja in hindi for class , short essay on durga puja in hindi for class, essay on durga puja in hindi 100 words, short essay on durga puja in hindi for class, durga puja par hindi mein nibandh, durga puja in hindi wikipedia, durga puja in hindi 2018, durga puja in kolkata in hindi के रूप में आप इसे खोज सकते हैं.

Essay on Durga Puja in Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 - Durga Puja Essay In Hindi

Durga Puja Essay In Hindi- दुर्गा पूजा पर निबंध 2018 – Essay on Durga Puja in Hindi

हमारे भारत देश को त्योहारों का देश भी कहा जाता हैं. यहाँ पर दुनियां के लगभग सम्पूर्ण धर्मो व जातियों के लोग निवास करते हैं जिनके अपने अपने त्यौहार व पर्व हैं. यहाँ पर आपकों हर महीने एक न एक पर्व या उत्सव देखने को मिलता हैं. जिनमें हिन्दुओं के दुर्गा पूजा का महत्वपूर्ण स्थान हैं. दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व में भक्ति व आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता हैं.

न केवल बंगाल बल्कि पूरा भारत वर्ष इसके हर्षोल्लास में डूबा नजर आता हैं. वैसे भी हर तीज त्यौहार का आस्तिक भक्त के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता हैं. एक तरफ लोगों का मिलना जुलना होता हैं तो वही आनन्द एवं उत्साह भी देखने को नजर आता हैं. आश्विन माह में दुर्गा पूजा का रूप ही कुछ ऐसा है जिसमें भक्ति, शौर्य, श्रद्धा सब कुछ नजर आता हैं.

हिन्दू धर्म में दो नवरात्र होते है पहले वासन्तीय जो चैत्र माह में तथा दुसरे दीपावली से ठीक पूर्व आश्विन महीने में जिन्हें शारदीय नवरात्र कहा जाता हैं. इन दोनों नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता हैं. मगर शारदीय नवरात्र जो दीपावली से 20 दिन पहले पड़ते हैं इनके विशेष धार्मिक महत्व का माना गया हैं.

न केवल धार्मिक महत्व के कारण इसे बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जाता है बल्कि सामाजिक व नैतिक महत्व भी हैं. नवरात्री में दुर्गा पूजा का आयोजन होता हैं. इन नौ रात व दिनों तक शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती हैं.

Essay on Durga Puja

दुर्गा पूजा मनाने के पीछे महिषासुरमर्दिनी देवी दुर्गा की कथा प्रचलित हैं. जिसकें अनुसार देवलोक यानी इन्द्रलोक के लिए देवताओं और दानवों के मध्य युद्ध ठन गया.

देवताओं के समूह का नेतृत्व स्वयं देवराज इंद्र कर रहे थे. दानवों की ओर से महिषासुर नाम का असुर लड़ रहा था. उसने अपने दैत्य पराक्रम से देवताओं के राजा इंद्र को परास्त कर इन्द्रलोक पर अपना राज्य स्थापित कर लिया.

अब सभी देवताओं के लिए संकट की घड़ी उत्पन्न हो गई, इस अत्याचारी के पापों के नाश का रास्ता खोजने के लिए सभी देवता विष्णु जी तथा शिवजी के पास गये, तथा उन्होंने महिषासुर द्वारा देवराज को परास्त करने की गाथा सुनाई. इस पर दोनों देवाधिदेव बेहद क्रोधित हो गये.

उनके क्रोध से दशों दिशाएं जलने लगी. उसी अग्नि का एक पुंज धरती पर देवी दुर्गा के रूप में गिरा. जिन्होंने महिषासुर दांव को युध्ह के लिए ललकारा और उसे मारकर देवताओं के राज्य को वापिस लौटाया.

गुजरात में शारदीय नवरात्र के दौरान गरबे की धूम रहती हैं. नवयुवक व नवयुवतियां अपने साथियों के साथ गरबा खेलते हैं. इस दौरान लोग व्रत रखते हैं. देवी की अंखड ज्योत जलाते हैं, प्रतिदिन हवन करते है और कुल मिलाकर पूरे भक्तिभाव से माँ दुर्गा की पूजा में लीन हो जाते हैं. तथा विधि विधान के साथ पूजा करते हैं. नवरात्रि के दौरान जगह जगह पर रामलीलाओं का आयोजन भी किया जाता हैं.

Short Essay & Paragraph on Durga Puja In Hindi

दुर्गा पूजा अनीति, अत्याचार तथा तामसिक प्रवृतियों के नाश के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता हैं. दुर्गापूजा के रूप में हम स्त्री शक्ति पूजा करते हैं. किन्तु क्या विडम्बना हैं कि जिस देश में स्त्री की पूजा सदियों से महिषमर्दिनी के रूप में होती रही हैं.

वही आज स्त्रियों को अपने ही घर समाज एवं देश में महिषासुर रूपी लोगों द्वारा मान मर्दन होता हैं. दुर्गापूजा की सार्थकता तब ही होगी. जब हम स्त्रियों को उनकी वास्तविक शक्ति का आभास कराएगें.

आज फिर अत्याचार, भ्रष्टाचार एवं तामसिक प्रवृतियों के प्रतीक महिषासुरों की संख्या में वृद्धि हो चुकी हैं. ऐसे समय में आवश्यकता इस बात की हैं कि जिस तरह देवताओं ने अपनी सारी शक्तियाँ देवी दुर्गा को सौपकर महिषासुर के नाश का निवेदन किया था, उसी प्रकार हम सभी अपनी सारी शक्तियाँ स्त्री को सौपकर उससे इन महिषासुरों के नाश का निवेदन करे.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *