Dhanteras Puja Vidhi In Hindi | धनतेरस की पूजा विधि 2018 सबसे सरल विधि

Dhanteras Puja Vidhi In Hindi | धनतेरस की पूजा विधि 2018 सबसे सरल विधि: 5 नवम्बर 2018 को इस साल धनतेरस का पावन पर्व मनाया जाएगा. यह भगवान् धन्वंतरि का जन्म दिन हैं. dhanteras puja vidhi in hindi 2018 में यहाँ आपकों पूजन की सबसे सरल एवं प्रमाणित विधि मन्त्र इत्यादि की जानकारी देगे. Dhan teras Puja Vidhi दिवाली से पूर्व मनाई जाने वाली प्रथम पूजा हैं. इस दिन विशेष कर बर्तनों आदि की खरीद की जाती हैं तथा आरोग्य के देव धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य एवं सुख सम्रद्धि की कामना की जाती हैं.

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धनतेरस पूजा विधि, कैसे करे धनत्रयोदशी पूजा, धनतेरस कथा पूजा मुहूर्त महत्व एवम बधाई शायरी (Dhanteras importance, Puja Vidhi, Katha, Muhurat, Shayari In Hindi): वर्ष भर का एकमात्र दिन जब मृत्यु के देव यमराज की पूजा की जाती हो. इस दिन विधि विधान के अनुसार यमराज की पूजा कर प्राणी अपने जीवन में अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाते हैं. धनतेरस का दिन दो अन्य देवताओं धन के खजाने के स्वामी कुबेर एवं अयोग्यता के स्वामी धन्वन्तरी देव की पूजा का दिन भी हैं. इसके पीछे यह मान्यता है कि जो भक्त धन त्रयोदशी के दिन विधि विधान के अनुसार पूजा करता हैं, उन्हें वर्ष भर किसी भी तरह के सम्पति एवं मान मर्यादा सुख की कमी महसूस नही होती हैं. इस महान पर्व पर की जाने वाली पूजा की सामग्री पर एक नजर.

धनतेरस पूजा सामग्री (dhanteras puja vidhi hindi me)

  • मान्यता के अनुसार धन त्रयोदशी की पूजा से पूर्व घर के एक कोने में मिटटी की हाथी की मूर्ति एवं भगवान् धन्वंतरि का चित्र लगाएं.
  • जल का आचमन करे इसके लिए ताम्बे या चांदी के जल आचमन का ही प्रयोग उपयुक्त रहता हैं.
  • पूर्ण मनोयोग के साथ जय श्री गणेशाय नमः का जाप करते हुए श्रीगणेश का पूजन करे.
  • अब अपने दाएं हाथ में चावल व फूल लेकर भगवान् ध्वन्तरी को प्रसाद रूप में भेट करे.
  • अब इस मन्त्र का जाप करे.

मंत्र : देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान
दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु काम
पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो
धन्वन्तरि स भगवानवतात सदा नः
ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः
ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि…

  • अब फिर से मूर्तियों पर पुष्प चढाएं तथा जल आचमन करे.
  • “पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि” इस मन्त्र के जाप के साथ ही तीन बार जल के छीटे देवे. तथा तस्वीर को जल से स्नान करावें
  • ॐ धनवन्तरयै नमः
    मंत्र :स्नानार्थे जलं समर्पयामि इस मन्त्र के साथ धन्वंतरि जी की तस्वीर को पंचामृत से स्नान करावें
  • पंचामृत स्नानार्थे पंचामृत समर्पयामि के वाचन के साथ फिर से स्वच्छ जल से स्नान करावे.
  • पंचामृत स्नानान्ते शुद्धोधक स्नानं समर्पयामि मंत्र जाप के साथ सुगन्धित इत्र का छिडकाव कराएं.
  • सुवासितं इत्रं समर्पयामि मन्त्र उच्चारण के साथ धवल वस्त्र भेट करावे.
  • वस्त्रं समर्पयामि अब चन्दन का टीका लगावें.

धनतेरस पूजा विधि एवं मंत्र उच्चारण

  • – गन्धं समर्पयामि (सुगन्धित पदार्थ या इत्र का छिडकाव करे)
  • अक्षतान् समर्पयामि (अक्षत का भोग चढावे)
  • पुष्पं समर्पयामि (पुष्प समर्पित करावे)
  • धूपम आघ्रापयामि (धुप दीपक इत्यादि जलाएं)
  • दीपकं दर्शयामि ( दियें के साथ आरती घुमाएं)
  •  नैवेद्यं निवेद्यामि (नारियल का भोग लगाएं)
  • आचमनीयं जलं समर्पयामि… (आप जहाँ बैठे है उनके चारो ओर पानी के छीटे छिडके)
  • ऋतुफलं समर्पयामि (पूजा सामग्री के साथ लाए गये फलों को चढाएं)
  • ताम्बूलं समर्पयामि (पान समर्पित कराएं)

धनतेरस का महत्व और अर्थ

हिन्दू पर्वों में धनतेरस की गिनती सुख सम्रद्धि एवं एश्वर्य प्रदान करने वाले उत्सवो में गिनती की जाती हैं. इस दिन कुबेर एवं धन्वंतरि की पूजा का महत्व हैं. इस पर्व की कथा का उल्लेख स्कन्द पुराण में मिलता है जिसके मुताबिक़ माना जाता है कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को धन्वंतरि जी अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे.

वर्ष 2018 में धन त्रयोदशी का यह पर्व 5 नवम्बर, सोमवार को मनाया जाता हैं. इस दिन विशेष रूप से नयी वस्तुओं की खरीद को बड़ा महत्व दिया जाता हैं. यह दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता हैं. पीतल ताबे एवं चाँदी के बर्तन इस दिन खरीदना शुभ माना जाता हैं.

धनतेरस की रात्री को यमराज की पूजा भी की जाती हैं. इस निमित दक्षिण दिशा में एक दीप प्रज्वल्लित किये जाने की प्रथा है जिसे यम द्वीप कहा जाता हैं. लोग इस दिन माँ लक्ष्मी गणेश जी एवं माता सरस्वती, लक्ष्मी जी की मूर्तियों की खरीद भी करते हैं.


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