About Diwali in Hindi | दिवाली के बारे में

Information About Diwali in Hindi: कहते है टाइम और स्पेस की कोई सीमा नही है रेत के कणों को नही गिना जा सकता, व्यक्ति के भावों को परखा नही जाता हैं ऐसी ही दिवाली का पर्व जिसकी असीमित विशेषताएं एवं महत्व हैं. आध्यात्म, सामाजिक आर्थिक एवं वैज्ञानिक महत्व के कारण दीपावली का पर्व मनाया जाता हैं. यह हिन्दू सम्प्रदाय का सबसे बड़ा पर्व हैं. क्या आप दिवाली के बारे में जानते हैं यदि नही तो लेख पूरा पढ़िए.

दिवाली/दीपावली क्या है? (Diwali in Hindi)Diwali in Hindi

About Deepawali in Hindi (दीपावली के बारे में)- दीपावली को दिवाली या दीपो उत्सव भी कहा जाता हैं. यह रोशनी का पर्व कहलाता हैं. इस दिन रंग बिरंगी लाइट्स के साथ सारा जहाँ आलोकित हो जाता हैं. दिवाली की परम्परा में दिए जलाने का विशेष महत्व हैं. प्रकाश रूपी ज्ञान इस संसार में फैलकर सम्पूर्ण अज्ञानता को मिटा दे, इसके पीछे यह संदेश छिपा होता हैं.

इस अवसर की एक अनूठी पहचान पठाखे भी हैं, भारत के किसी कोने में भी चले जाये दिवाली की रात पटाखों की गूंज से गुंजित होती ही रहेगी. इसके पीछे मान्यता है कि नकारात्मक भावों को दूर किया जाता हैं.

भारत में त्योहारों एवं उत्सवों पर अपने मित्रों पड़ोसियों तथा रिश्तेदारों को गिफ्ट भेजकर शुभकामनाएं दी जाती हैं. इस तरह दिवाली पर गिफ्ट के आदान प्रदान भी किये जाते हैं. गिफ्ट में लोग एक दुसरे को मिठाई भेजते हैं.

कार्तिक अमावस्या तिथि को दिवाली का पर्व मनाया जाता हैं यह पूरा त्यौहार पांच दिनों का होता हैं. जिसका पूर्ण रूप से भक्ति और आस्था से गहरा जुड़ाव होता हैं दिवाली के पहले दिन को धनतेरस कहते हैं लोग अपने और अपनों के जीवन में सुख सम्रद्धि की कामना करते हैं.

दिवाली का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी का होता है यह मृत्यु के देव यमराज का दिन माना जाता हैं इस दिन सवेरे जल्दी उठकर स्नादी किया जाता हैं तथा रात्रि में यमराज के नाम से दीपदान किया जाता हैं. इसका अगला दिन लक्ष्मी पूजन का होता हैं. इस दिन की रात को माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं तथा उनसे सुख सम्रद्धि का आशीर्वाद लिया जाता हैं.

लक्ष्मी जी पूजन का अगला दिन गोवर्धन पूजा का और इसके बाद का अंतिम एवं पांचवां दिन भाईदूज का होता हैं. धनतेरस के दिन बड़ी संख्या में लोग खरीददारी के लिए निकलते हैं. बर्तनों आदि की खरीद की जाती हैं. दिवाली मनाने की कथा भगवान राम से जुडी हुई हैं. ऐसा कहा जाता हैं अमावस्या की रात को भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या आये थे.

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