10 lines on diwali in hindi दिवाली पर 10 लाइन का छोटा निबंध भाषण अनुच्छेद

10 lines on diwali in hindi दिवाली पर 10 लाइन का छोटा निबंध भाषण अनुच्छेद : दिवाली का अर्थ है दीपों की जगमग एवं फटाखों की चहुदिशा में गूंज. वर्षभर मनाएं जाने वाले हिन्दू पर्वों का सिरमौर दिवाली ही हैं. कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दिवाली का उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं. अंधकार एवं अन्याय पर प्रकाश व न्याय की विजय के इस प्रतीक पर्व को वर्षा ऋतू की समाप्ति एवं शीत ऋतू के आगमन के समय मनाया जाता हैं, जो हर साल अक्टूबर अथवा नवम्बर में पड़ता हैं. 2018 में दीपावली की डेट 7 नवम्बर हैं.

10 lines on diwali in hindi दिवाली पर 10 लाइन का छोटा निबंध भाषण अनुच्छेदम – दीपावली और दिवाली अनुयायी – हिन्दू. सिख, जैन और बौद्ध प्रकार – हिन्दू, सांस्कृतिक उद्देश्य – धार्मिक निष्ठा और उत्सव शुरुआत – धनतेरस, दीपावली से दो दिन पहले समाप्ति – भैया दूज, दीपावली के दो दिन बाद तिथि – हिन्दू पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 19, 2017 उत्सव – दिया जलाना, घर की सजावट और कुछ खरीदारी समान पर्व – काली पूजा, दीपावली (जैन) अन्य कार्यक्रम – मिठाई बाँटना, घरों को प्रकाश से सजाना और एक-दुसरे को बधाई देना

धार्मिक निष्ठां एवं विश्वास के इस पर्व को हिन्दुओं के अतिरिक्त सिख जैन एवं बौद्ध धर्म के अनुयायी भी मनाते हैं. दिवाली अर्थात दीपावली दरअसल में पांच दिनों के त्योहार है जिनकी शुरुआत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी जिसे धनतेरस कहा जाता है के साथ आरम्भ होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज के साथ समाप्त होता हैं. दिया जलाना, घर की सजावट और कुछ खरीदारी, मिठाई बाँटना, घरों को प्रकाश से सजाना और एक-दुसरे को बधाई देना इत्यादि दिवाली की मुख्य परम्पराएं हैं.

दिवाली पर छोटा निबंध 10 लाइन में

दीप और अवली से मिलकर बने शब्द दिवाली का अर्थ होता है दीयों की कतार. इस दिन घी के दीयों से हर ओर रौशनी का माहौल होता हैं. संभवतया इसी कारण दीपावली नाम पड़ा हैं. इसे मनाने का बड़ा धार्मिक एवं सामाजिक महत्व भी हैं. अंधकार से उजाले की ओर ले जाने वाले इस पर्व को जैन लोग अपने आराध्य महावीर स्वामी जी का निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं. सिख समुदाय के लोग दिवाली को बड़ी छोड़ के रूप में मनाते हैं.

दूसरी तरफ हमारी प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता हैं कि पिता दशरथ के वचन की पालना में भगवान् रामचन्द्र जी को चौदह वर्ष का वनवास मिला था. जब वों अपने वनवास की अवधि पूर्ण कर अपने राज्य अयोध्या में लौटे तो वह कार्तिक अमावस्या का दिन था. लोगों ने घी के दिए जलाकर प्रभु श्रीराम जी का स्वागत किया, सम्पूर्ण नगरी दीयों की रौशनी से जगमगा उठी थी, तब से हर साल कार्तिक अमावस्या को हम दिवाली का उत्सव मनाते हैं.

दीपावली पर 10 लाइन का भाषण

पांच पर्वों के समूह को दिवाली कहा जाता हैं. दिवाली के मुख्य आकर्षण में बाजार की रौनक, माँ लक्ष्मी का पूजन, पटाखों से भरे बाजार एवं लोगों की धर्म में विश्वास एवं आस्था देखते ही बनती हैं. दिवाली उत्सव की शुरुआत धनतेरस के साथ होती है. इस दिन कुबेर एवं भगवान् धन्वन्तरी जी का जन्म हुआ था. इस दिन खरीददारी करना अति शुभ माना जाता हैं. कहा जाता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु, आभूषन, बर्तन, वाहन आदि सौभाग्यशाली होते है.

धनतेरस के दिन बाजार खरीददारी में व्यस्त नजर आते हैं. माँ लक्ष्मी का पूजन इसी दिन से आरम्भ हो जाता हैं. श्री गणेश, महालक्ष्मी एव महासरस्वती की लोग मूर्तियाँ घर में लाकर घर को देवलोक की भांति सजाते है तथा हर दिन घर में स्वादिष्ट पकवान भी बनाएं जाते हैं.

दीपावली के अन्य पर्वो में भाईदूज का विशेष महत्व है जो दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है. रक्षाबंधन के बाद यह भाई बहिन का सबसे बड़ा त्योहार होता हैं. इस दिन बहिन अपने भाई की दीर्घायु के लिए उपवास रखती है तथा भाई के घर आकर ही वह उपवास तोड़कर भाई को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं. भाई बदले में अपनी बहिन को विशिष्ट उपहार भी देता हैं. बच्चों के लिए दिवाली का पर्व बेहद ख़ास हो जाता है उन्हें कई दिन की छुट्टियाँ मिल जाती हैं. वे घुमने का लुफ्त उठाते है.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *