दीपावली पर निबंध हिंदी में कविता शायरी कोट्स एस्से

दीपावली पर निबंध हिंदी में कविता शायरी कोट्स एस्से | दिवाली पर निबंध | दिवाली निबंध | दीपावली हिन्दी निबंध 

हेल्लों फ्रेड्स आप सभी को दीवाली की शुभकामनाएं, दीपावली पर निबंध में आपके लिए हिन्दुओं के सबसे बड़े उत्सव दीपावली पर छोटा बड़ा दीपावली का निबंध आपके लिए लेकर हाजिर हुआ हूँ. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के लिए हमने पहले से ही कई बेहतरीन निबंध 100, 200, 250, 300, 400 और 500 शब्दों में पेश किये हैं. जिन्हें आप नीचे दी गई लिंक पर जाकर कक्षावार भी पढ़ सकते हैं.

दीपावली पर निबंध हिंदी में 2018

भारत देश को पर्वों एवं उत्सवों का देश भी कहा जाता है यहाँ विश्व के अधिकतर धर्मों के लोग निवास करते है सब मिल जुलकर एक साथ रहते है तथा एक दूसरे के त्योहारों को आदर महत्व देकर उन्हें भी मनाते हैं. बिना मजहबी भेदभाव के हर महीने यहाँ हम पर्व मनाते हैं. भाग दोड़ की इस जिन्दगी में ये दीपावली जैसे पर्व एक छोटे से समय में ही बड़ी खुशी उत्साह एवं चैन देते हैं. लोग अपनी दिनचर्चा से वक्त निकालते हुए पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा भाव के साथ एक दुसरे के साथ आते है तथा इन पर्वों के लुफ्त को उठाते हैं.

दीपावली पर निबंध में हम इस त्योहार को कब मनाते है क्यों मनाया जाता है इसका महत्व पौराणिक कथा प्रसंगों के बारे में भी आपके साथ चर्चा करने वाले हैं. भारत के साथ साथ यह दुनियां के कई अन्य देशों में भी मनाया जाता हैं. यह पांच दिनों के त्योहारों को मिलाकर बना एक बड़ा पर्व है जिन्हें दीपो का त्यौहार अथवा रोशनी का पर्व भी कहा जाता हैं. इसके अंतर्गत आने वाले पांच पर्व में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, बड़ी दिवाली, गौवर्धन पूजा एवं भाई दूज मुख्य हैं.

दिवाली के त्यौहार का पहला दिन धनतेरस अर्थात् धन त्रयोदशी का होता हैं, जो दीपावली से दो दिन पहले कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता हैं. इस दिन की मान्यता के अनुसार भगवान् धन्वंतरि का जन्म इसी दिन हुआ था. उनके अवतरण के समय उनके हाथ में कलश लिए हुए था, इस कारण इस दिन बर्तनों को खरीदना शुभ माना जाता हैं. हिन्दू धर्म की ऐसी मान्यता है कि जो वस्तु इस दिन खरीदी जाती है वह तेरह गुना लाभ प्रदान करती है. अतः लोग कीमती गहनें बर्तन वाहन आदि की खरीद के लिए धनतेरस के दिन को ही चुनते हैं.

इस दिन लक्ष्मी पूजन के लिए मूर्तियाँ व पूजा सामग्री की खरीद भी की जाती हैं. इस पर्व पर घी के दिए जलाए जाते है तथा कुबेर की पूजा भी की जाती हैं. धनतेरस का अगला दिन नरक चतुर्दशी का होता हैं. इसकी कथा के अनुसार कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था. इस दैत्य ने देवराज इंद्र को पराजित कर सभी देवताओं को देवराज्य से भगा दिया था.

इसे रूप चौदस या छोटी दिवाली भी कहा जाता हैं, जो दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती हैं. इस दिन सवेरे जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता हैं. यह वर्ष भर में एकमात्र दिन होता है जब यमराज की पूजा की जाती हैं. अकाल मृत्यु के प्रकोप के निवारण के लिए लोग यमराज के नाम का एक दिया दक्षिण दिशा में रखते हैं.

दीपावली पर निबंध हिंदी में

कार्तिक अमावस्या तिथि को लक्ष्मी पूजन एवं दिवाली का पर्व मनाया जाता हैं. यह पांच दिनों के पर्व में सबसे बड़ा दिन माना जाता हैं. इस दिन माँ लक्ष्मी का जन्म हुआ था इस कारण आज उनका विधि विधान के अनुसार पूजन किया जाता हैं. लोगों में ऐसी मान्यता है कि महालक्ष्मी इस दिन घर घर निवास करती है इस कारण लोग अपने घरों को साफ़ सुथरा बनाते है तथा माँ से सुख सम्रद्धि की कामना करते है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक़ दीपावली का उत्सव अक्टूबर नवम्बर माह में मनाया जाता हैं.

इसे मनाने के पीछे भगवान् राम से जुड़ी हुई एक कथा हैं, जिसके अनुसार माना जाता है कि इस दिन अयोध्या के स्वामी श्रीराम सीता एवं लक्षमण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे. उनके आगमन की खुशी में लोगों ने घी के दीपक जलाए और उनका स्वागत किया, इस तरह से यह पर्व हर साल मनाया जाता हैं. लोग अपने घरों को दीपक की रौशनी से प्र्ज्वव्लित करते है चारो ओर रोशनी का महौल होता हैं. जैन धर्म में भी इस दिन का बड़ा महत्व है दिवाली के दिन ही महावीर स्वामी ने अपनी देह त्यागी थी इस कारण इसे हम निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाते हैं.

हम सभी इस दिन बड़ी श्रद्धा के साथ गणेश लक्ष्मी की पूजा करते है उन्हें मिष्ठान का भोग चढाया जाता हैं. घर घर माँ की आरती जयकारे गूंज उठते हैं. चारो तरफ दिवाली की रोशनी से संसार जगमगा उठता हैं. रात भर पटाखों की गूंज सुनाई देती हैं. लोग आपसी गिले शिकवे भूलकर एक दुसरे को दिवाली शुभकामनाएं देते हैं. घर घर आकर्षक रंगोली के चित्र बनाए जाते हैं. बच्चे हंसी खुशी के इस पर्व का पूरा आनन्द उठाते हैं.

दीपावली त्योहार पर छोटा निबंध

पांच दिनों के इस पर्व का तीसरा दिन दिवाली का होता हैं तथा इसका अगला दिन गौवर्धन पूजा का होता है जो कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाते हैं. यह गाय, कृष्ण एवंम इंद्र से जुड़ा पर्व हैं. पौराणिक कथा के अनुसार लोग इस दिन इंद्र को खुश करने के लिए उनकी पूजा करते है तथा आगामी वर्ष में अच्छी फसल पैदावार की कामना करते हैं.

किसी समय राजा इंद्र गौवर्धन क्षेत्र के लोगों से रुष्ट हो जाता है क्योंकि वहां के लोग स्वयं से ज्यादा कृष्ण को मानते थे. इस कारण अपने अहंकार के चलते पर्व को मुसलाधार वर्षा से डुबाने का प्रयास किया. इस पर त्रिलोक स्वामी अपने क्षेत्र की जनता को बसाने के लिए पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लेते हैं सात दिनों की घ्न्घौर वर्षा के बाद भी इंद्र गौवर्धन का कुछ भी नही बिगाड़ पाता हैं. भगवान् कृष्ण की लीला के आगे उनके अहंकार चूर चूर हो जाता हैं. इसलिए इस दिन कृष्ण जी एवं गायों की पूजा की जाती हैं.

दीपावली के बाद का दूसरा दिन भाई दूज का दिन होता है जो द्वितीया तिथि को पड़ता हैं. रक्षाबंधन के बाद आने वाला यह भाई बहिन का सबसे बड़ा त्यौहार हैं. भाई की दीर्घायु के लिए बहिन इस दिन व्रत रखती है तथा उनके तिलक कर भगवान से लम्बी आयु की कामना करती हैं.


आशा करता हूँ मित्रों दीपावली पर निबंध हिंदी में का यह लेख आपको पसंद आया होगा. इस दिवाली एस्से 2018 में दी गई जानकारी आपकों पसद आई हो तो प्लीज इसे शेयर करना ना भूले. दिवाली के अन्य लेख नीचे दिए गये हैं.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *