Diwali 2018 Puja Vidhi & Deepawali Pujan Samgri In Hindi दिवाली पूजन कैसे करें दीपावली की पूजा सामग्री और पूजा विधि इन हिंदी

Diwali 2018 Puja Vidhi & Pujan Samgri In Hindi दिवाली पूजन कैसे करें दीपावली की पूजा सामग्री और पूजा विधि इन हिंदी: लो दिवाली तो आ ही गई यह अपने साथ जितनी खुशियाँ लाइ है उतनी व्यस्तता को भी लेके आई हैं. हमारी दीपावली की तैयारी का सफर तो दशहरा पर ही शुरू हो गया था. घर की साफ़ सफाई और उन्हें चमकाने का कार्य तो लगभग पूर्ण कर ही लिया होगा. Diwali 2018 Puja Vidhi & Deepawali Pujan Samgri List (Maa Laxmi Pooja) पर तैयारियां हो ही गई होगी. Diwali 2018 पर हर किन्ही की तमन्ना माँ को खुश कर अपने घर में उन्हें रखने की रहती हैं.  Diwali Puja Vidhi Laxmi Ji Ganesh Ji Pujan & Diwali Puja Ki Samgri को हमारे धार्मिक विधि विधान के अनुसार ही सम्पन्न करवाना चाहिए. दिवाली की पूजा 2018 शुभ मुहूर्त में ही करवाई जानी चाहिए, ताकि इसके लाभ को हम प्राप्त कर सके.

दिवाली पूजन की सामग्री : Diwali Puja Samagri For Laxmi Ganesh Ji Pujan

दीपावली पूजन की सामग्री : Diwali Puja Samagri For Laxmi Ganesh Ji Pujan

Diwali Ki Pooja Kaise Kare Step By Step At Home Deepawali 2018 Laxmi Pooja Muhurat Vidhi Pujan Samgri In Hindi:  यहाँ आपकों माँ लक्ष्मी की पूजा में प्रयुक्त की जाने वाली दिवाली पूजा सामग्री की डिटेल्स बता रहे हैं. महालक्ष्मी पूजन में रोली, , कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान्न, 11 दीपक इन सभी चीजों को पूजा के वक्त अपने पास रखा जाना चाहिए.

Deepawali Puja Vidhi 2018 घर पर दीपावली लक्ष्मी पूजा कैसे की जाती है दिवाली पूजन विधि हिंदी में

दिवाली पूजा विधि

दिवाली पूजा का सही तरीका दिवाली का पूजन कैसे करे Diwali Laxmi Pooja Kaise kare Deepawali Pooja Vidhi At Home: दिवाली के दिन प्रत्येक व्यक्ति, वो चाहे व्यवसाय से हो, सेवा कार्य से हो या नौकरी से, प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवसायिक स्थान एवं घर पर मां लक्ष्मी एवं गणेश जी का विधिवत पूजन कर धन की देवी लक्ष्मी से सुख-समृद्धि एवं गणेश जी से बुद्धि की कामना करते है.

Diwali Worship Method Pooja samgri Deepawali Puja Kaise Kare : दिवाली के पूजा में ध्यान रखने योग्य बाते व मंत्र

Diwali Worship Method Pooja samgri Deepawali Puja Kaise Kare

सबसे पहले चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजा करने वाले मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है। दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अलावा एक दीपक गणेशजी के पास रखें.

Step By Step Diwali Pujan Method दिवाली 2018 महालक्ष्मी गणेश जी सरस्वती पूजा विधि सम्पूर्ण पूजा मंत्र की जानकारी

दिवाली पूजन की सरलतम विधियां
दिवाली पर शास्त्रीय विधि से कैसे करें पूजन…

देवी लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपनी सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मीजी को कुछ वस्तुएं विशेष प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए।

दिवाली 2018 पूजा की विधि

दीप स्थापना:

सबसे पहले पवित्रीकरण करें। आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा-सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें:

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥

पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें

हाथों को धो लें

ॐ हृषिकेशाय नमः

आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है। फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर

स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रधान होता है।

संकल्प:

आप हाथ में अक्षत लेकर, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।

सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए। हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है।

हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। 16 माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए। 16 माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौलि लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए।

पूजन विधि:

सर्वप्रथम गणेश और लक्ष्मी का पूजन करें।

ध्यान

भगवती लक्ष्मी का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीलक्ष्मी की नवीन प्रतिमा में करें।

दीपक पूजन:

दीपक जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। दीपावली के दिन पारिवारिक परंपराओं के अनुसार तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा इनसे अधिक दीपक प्रज्वलित करके एक थाली में रखकर कर पूजन करने का विधान है।

उपरोक्त पूजन के पश्चात घर की महिलाएं अपने हाथ से सोने-चांदी के आभूषण इत्यादि सुहाग की संपूर्ण सामग्रियां लेकर मां लक्ष्मी को अर्पित कर दें। अगले दिन स्नान इत्यादि के पश्चात विधि-विधान से पूजन के बाद आभूषण एवं सुहाग की सामग्री को मां लक्ष्मी का प्रसाद समझकर स्वयं प्रयोग करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।

अब श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीलक्ष्मी से क्षमा-प्रार्थना करें।

न मैं आह्वान करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो।

यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों।

भगवती श्रीलक्ष्मी को यह सब पूजन समर्पित है….

दिवाली पूजा गणेश जी की पूजा और आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।

एक दंत दयावंत चार भुजाधारी ।

माथे पर तिलक सोहे, मुसे की सवारी ।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।

लड्डुवन का भोग लगे, संत करे सेवा ।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।

अंधन को आंख देत, कोढ़ियन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।

सुर श्याम शरण आये सफल कीजे सेवा ।। जय गणेश देवा

जय गणेश जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।

महालक्ष्मी जी की आरती लक्ष्मी पूजन आरती व विधि

ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता

सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

दुर्गारूप निरंजन, सुख संपत्ति दाता

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता

कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्गुण आता

सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता

खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

शुभ गुण मंदिर, सुंदर क्षीरनिधि जाता

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आंनद समाता, पाप उतर जाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

स्थिर चर जगत बचावै, कर्म प्रेर ल्याता

तेरा भगत मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,

तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

दिवाली २०१८ की पूजन विधि में जिन देवी देवताओं का पूजन किया गया है उनकी मूर्ति तथा पूजा की बसी हुई सामग्री को दीपावली के दुसरे दिन घर के पास किसी वृक्ष मे अर्पित कर देनी चाहिए.

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